पंचायती राज व्यवस्था (उ० प्र०) में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, और जिला पंचायत आते हैं। पंचायती राज व्यवस्था आम ग्रामीण जनता की लोकतंत्र में प्रभावी भागीदारी का सशक्त माध्यम है। 73वाँ संविधान संशोधन द्वारा एक सुनियोजित पंचायती राज व्यवस्था स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
73वां संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होते ही प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के पंचायत राज अधिनियमों अर्थात् उ.प्र. पंचायत राज अधिनियम-1947 एवम् उ.प्र. क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम-1961 में अपेक्षित संशोधन कर संवैधानिक व्यवस्था को मूर्तरूप दिया गया। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1995 में एक विकेन्द्रीकरण एवं प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन किया गया था जिसके द्वारा की गई संस्तुतियों के अध्ययनोंपरान्त तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति (एच.पी.सी.) द्वारा वर्ष 1997 में 32 विभागों के कार्य चिन्हित कर पंचायती राज संस्थाओं को हस्तान्तरित करने की सिफारिश की गयी थी। प्रदेश सरकार संवैधानिक भावना के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं को अधिकार एवं दायित्व सम्पन्न करने के लिए कटिबद्ध है। अधिक पढ़ें..

विभागीय दस्तावेज



योजनायें - पंचायतीराज विभाग (उत्तर प्रदेश)

पंचायती राज विभाग के अंतर्गत क्रियान्वित योजनायें
1. निर्मल भारत अभियान (NBA) 2. पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (BRGF)
3. भूख मुक्ति एवं जीवन रक्षा गारंटी योजना 4. डा० राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना
5. पंचायत शशक्तिकरण एवं प्रोत्साहन योजना (PEAIS) 6. राज्य वित्त आयोग (SFC)
7. तेरहवां वित्त आयोग (THFC) 8. राजीव गाँधी पंचायत शशक्तिकरण अभियान (RGPSA)

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